प्रकाशनार्थ/परशारणार्थ
डबल इंजन की नितीश सरकार गरीब विरोधी----
सिद्दीकी
बाजपट्टी
04 जनवरी 2022
भाकपा माले की एक बैठक बाजपट्टी प्रखण्ड के शिवाईपट्टी में देर शाम सम्पन्न हुई जिसकी अध्यक्षता पार्टी के स्थानीय कॉमरेड सुशील कापड ने की बैठक में पार्टी जिला कमिटी की ओर से आए पार्टी के वरिष्ठ नेता सह इंसाफ मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष नेयाज अहमद सिद्दीकी ने जहाँ एक ओर केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा वहीँ बिहार की डबल इंजन की नितीश सरकार को भी आड़े हाथों लेते हुए इसे गरीब विरोधी सरकार बताया। उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार एक ओर गरीब हितैषी डपोरशंखी नारे लगा रही है वहीं भाजपा की गोद में बैठकर गरीब,मजदूर, किसान,एवं महिला विरोधी कार्यकलाप में लिप्त है।
उन्होंने ने मुस्लिम महिलाओं की साइबर जगत में विभिन्न ऐप्प के जरिए टारगेट करने की प्रवृत्ति की कड़ी निंदा करते हुए इसकी उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराते हुए अपराधियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की। बैठक में हाल के दिनों में बिहार में दलितों, गरीबों, अल्पसंख्यकों व महिलाओं पर लगातार हो रहे हमले पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। वैशाली में हुए सामुहिक बलात्कार व हत्या की सबसे हालिया प्रकरण पर चर्चा हुई,जिसमें पूरे गांव के सामने सामंती दबंगों ने एक दलित छात्रा को उठा लिया। जब छात्रा के पिता अपराधी अनुराग चौधरी के पिता के पास पहुंचे तो उन्होंने कहा कि मुकदमा मत करो,2-3 दिन में तुम्हारी बेटी लौट आएगी। 6 दिनों बाद उस छात्रा की क्षत-विक्षत लाश मिली। उसीप्रकार औरंगाबाद में वोट न देने के शक में दबंगों ने दलितों को थूक चटवाया। माले नेताओं ने कहा कि ऐसा लगता है कि भाजपा-जदयू की डबल इंजन सरकार बिहार के क्रम को ही उलट देना चाहती है। यह पूरा बिहार जानता है कि वोट देने से लेकर अपने मान-सम्मान के लिए बिहार के गरीबों ने लगातार लड़ाईयां लड़ी हैं और शहादत दी है। यदि सरकार यह सोंच रही है कि एक बार फिर से बिहार में सामंती दबंगों का राज स्थापित कर दिया जाय तो हम इसे कभी होने नहीं देंगे। सदन से लेकर सड़क तक हमारी लड़ाई जाड़ी रहेगी।
माले नेताओं ने पंचायत चुनाव में संस्थाबद्ध भ्रष्टाचार, पैसों के बलपर सीटों की खरीद-बिक्री की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि समाज सुधार यात्रा का ढोंग रचने वाले नीतीश कुमार को इसका जवाब देना होगा कि आखिर क्या वजह है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का लगातार क्षरण होता जारहा है।गांधी जी का ग्राम स्वराज का नारा आज खरीद-फरोख्त के व्यवसाय में बदल गया है। इसकी जवाबदेही व जिम्मेवारी राज्य सरकार की ही बनती है। इस से वह भाग नहीं सकती। पंचायत चुनाव पर सरकार को रिव्यू करनी चाहिए।
किसान आंदोलन के दबाव में मोदी सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े। नीतीश कुमार कहते हैं कि वह केंद्र सरकार का मामला था भला इसमें वे क्या कह सकते हैं? लेकिन हम उनसे कहना चाहते हैं कि पंजाब के किसान यही तो कह रहे थे किउन्हें बिहार के किसानों की हालत में मत पहुंचाइये। बिहार में 2006 में ही एपीएमसी एक्ट को खत्म कर के नीतीश कुमार ने बिहार के किसानों को बाजार के हवाले छोड़ दिया। बिहार में शायद ही कहीं किसानों का धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता हो। हालात यह है कि लोग अपना धान जलाने को विवश हैं। हम मजबूती से बिहार में फिर से एपीएमसी एक्ट की पुनर्बहाली की मांग करते हैं।
नल-जल योजनाओं सहित अन्य योजनाओं में भ्रष्टाचार, कैग की रिपोर्ट में आई गड़बड़ी,मनरेगा में काम, 19,लाख रोजगार, विश्वविद्यालयों में संस्थाबद्ध भ्रष्टाचार, कुपोषण, शिशु मृत्यु दर,पोषण आदि सवालों को भी मजबूती से उठाया गय। कहा कि सरकार के विकास के दावे की पोल तो खुद नीति आयोग की रिपोर्ट ही खोल रही है। न जाने किस मुंह से सरकार अपनी पीठ खुद ठोक रही है।
भाकपा माले ने ही सबसे पहले बिहार के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की थी जिसे तथाकथित डबल इंजन की सरकार आजकल यह काम नहीं करवा सकी। इस सच से बचने के लिए भाजपा-जदयू के लोग आपस में ही बयानबाजी करते रहते हैं। लेकिन उनकी हकीकत बिहार की जनता जानती है।
नेताओं ने सीतामढ़ी जिले में लगातार बढ़ रहे आपराधिक घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि जिले में लूट, डकैती, हत्या जैसी आपराधिक घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बाजपट्टी थाना क्षेत्र में भी लगातार घटनाएं होरही हैं और पुलिस प्रशासन पूर्णरूप से पंगु हो चुका होता है और अपराधियों के सामने घुटने टेक दिया है। नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अविलंब अपराध पर लगाम नही लगाया गया तो हमारी पार्टी इसके खिलाफ आंदोलन छेड़ेगी। बैठक में जिला कमिटी सदस्य रघुवीर यादव, पप्पू सिंह,राकेश कुमार विद्यार्थी, नंदकिशोर यादव, मो० मुश्ताक़ इत्तेयादि ने विचार व्यक्त किए।
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