सोनबरसा सर्लाही- नुवाकोट के देवीघाट, ढुंगे बाजार और त्रिशूली समेत दर्जनों गांवों में तबाही का मंजर देख भावुक हुए पूर्व विधायक अशोक यादव, कहा—“ऐसा भयावह दृश्य कभी नहीं देखा”
सोनबरसा सर्लाही/नुवाकोट नेपाल में पिछले दिनों आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी को पूरी तरह तबाह कर दिया है. देखते ही देखते लोगों के वर्षों की मेहनत से बनाए गए आशियाने, दुकानें और रोजी-रोटी के साधन बाढ़ के तेज बहाव और मलबे में समा गए. कहीं मकानों का नामोनिशान नहीं बचा तो कहीं दो मंजिला मकान भी मलबे के ढेर में तब्दील हो गए.बाढ़ के बाद प्रभावित इलाकों में चारों तरफ तबाही, चीख-पुकार और बेबसी का मंजर दिखाई दे रहा है.इसी भयावह स्थिति को करीब से देखने और पीड़ित परिवारों का दर्द जानने के लिए सर्लाही जिला के पूर्व विधायक अशोक यादव ने नुवाकोट जिले के देवीघाट, ढुंगे बाजार, त्रिशूली सहित दर्जनों बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने प्रभावित लोगों से मुलाकात कर बाढ़ से हुई तबाही और उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी ली.दौरे के दौरान सामने आए मंजर ने पूर्व विधायक को भी झकझोर कर रख दिया.चारों तरफ फैले मलबे और उजड़े घरों को देखकर उन्होंने कहा कि “ऐसा भयावह दृश्य मैंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा.” उन्होंने कहा कि जिन घरों में कुछ दिन पहले तक परिवार के सदस्य हंसी-खुशी रह रहे थे, आज वहां सिर्फ मलबा दिखाई दे रहा है. लोगों की आंखों के सामने उनका आशियाना, सामान और वर्षों की कमाई पानी की तेज धारा में बह गई.किसी का घर उजड़ा, किसी का रोजगार छिना
बाढ़ ने केवल मकानों को ही नहीं उजाड़ा, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों से उनका रोजगार और जीवन-यापन का साधन भी छीन लिया है. कई परिवार अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं. छोटे दुकानदारों और व्यवसायियों की दुकानें तथा सामान बर्बाद हो जाने से उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.पूर्व विधायक अशोक यादव ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रभावित लोगों को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता. जिन परिवारों ने अपना सब कुछ खो दिया है, उन्हें तत्काल सरकारी मदद की जरूरत है. उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री का वितरण युद्धस्तर पर कराया जाए.राहत में देरी नहीं, हर पीड़ित तक पहुंचे मदद अशोक यादव ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल खाद्य सामग्री, स्वच्छ पेयजल, कपड़े, दवाइयां, तिरपाल और अस्थायी आवास की व्यवस्था की जाए. साथ ही जिन इलाकों में अभी भी लोग फंसे हुए हैं, वहां राहत और बचाव दलों को तेजी से भेजा जाए.उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण जिन परिवारों ने अपने घर खो दिए हैं, उनके पुनर्वास की भी ठोस व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए. प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर बीमारियों की रोकथाम के लिए आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं.
यह सिर्फ मकानों का नहीं, हजारों परिवारों के सपनों का मलबा है.पूर्व विधायक ने कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान को केवल मकानों और सड़कों की क्षति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. मलबे के नीचे हजारों परिवारों के सपने, वर्षों की मेहनत और उनकी पूरी जिंदगी दबी हुई है. ऐसे कठिन समय में सरकार की प्राथमिकता हर पीड़ित परिवार तक तत्काल राहत पहुंचाना और उन्हें दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए साहस .उन्होंने प्रशासन से अपील की कि राहत एवं पुनर्वास कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो और अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सहायता पहुंचाई जाए. साथ ही उन्होंने समाज के सक्षम लोगों और सामाजिक संगठनों से भी आगे आकर बाढ़ पीड़ितों की मदद करने की अपील की.बाढ़ के बाद नुवाकोट के प्रभावित इलाकों में पसरा सन्नाटा और मलबे में तब्दील हुए आशियाने इस प्राकृतिक आपदा की भयावहता की कहानी खुद बयां कर रहे हैं. अब पीड़ित परिवारों की निगाहें सरकार और प्रशासन की ओर टिकी हैं कि कब राहत पहुंचेगी और कब उजड़ी जिंदगी फिर से पटरी पर लौटेगी।


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